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Main kuchh behtar dhundh raha hun
Vigyan Vrat
मैं
कुछ
बेहतर
ढूँढ़
रहा
हूँ
घर
में
हूँ
घर
ढूँढ़
रहा
हूँ
घर
की
दीवारों
के
नीचे
नींव
का
पत्थर
ढूँढ़
रहा
हूँ
जाने
किसकी
गरदन
पर
है
मैं
अपना
सर
ढूँढ़
रहा
हूँ
हाथों
में
पैराहन
थामे
अपना
पैकर
ढूँढ़
रहा
हूँ
मेरे
क़द
के
साथ
बढ़े
जो
ऐसी
चादर
ढूँढ़
रहा
हूँ
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