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Wo gudiya aur mehengi ho gayi thi
Iqbal Ashhar
वो
दिन
आया
कि
जब
पूरा
हुआ
मैं
मगर
तब
तक
वो
आधी
हो
गई
थी
मैं
नीचा
हो
गया
अपनी
नज़र
में
मेरी
आवाज़
ऊँची
हो
गई
थी
खुली
ही
रह
गईं
आख़िर
वो
आँखें
मेरे
आने
में
देरी
हो
गई
थी
मैं
गुल्लक
तोड़कर
वापस
गया
तो
वो
गुड़िया
और
महंगी
हो
गई
थी
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